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नई दिल्ली.चार साल बाद एनडीए में शामिल हुआ जेडीयू टूट के कगार पर है। इसकी वजह है नीतीश कुमार और शरद यादव के बीच 43 साल पुरानी दोस्ती में आई दरार। दोनों ही नेता जनता दल परिवार से जुड़े रहे हैं। जनता दल परिवार से अलग होकर 1994 में नीतीश ने समता पार्टी बनाई। 1999 में शरद यादव ने जनता दल यूनाइटेड बनाई। बाद में समता पार्टी का जेडीयू में विलय हो गया। हालांकि, ये पहला मौका नहीं है जब जनता दल परिवार से निकले नेताओं या उनके बनाए दलों में बिखराव हुआ है। 1990 से अब तक ये दल 11 बार टूटे हैं। अगर शरद यादव अलग होते हैं तो यह 12वीं टूट होगी। DainikBhaskar.com आपको बता रहा है 29 साल पहले बने जनता दल में कब-कब बड़ा बिखराव हुआ। इस बिखराव के पीछे क्या कहानी रही। साथ ही इससे निकले दल अब राजनीतिक रूप से कितने मजबूत हैं।
इस बार कहां पड़ी फूट?
– मामला जनता दल यूनाइटेड का है। 2013 में नीतीश कुमार की अगुआई में जदयू ने एनडीए छोड़ दिया था। इसके बाद 2015 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने कांग्रेस, आरजेडी के साथ महागठबंधन बनाया और चुनाव जीता।
– हाल ही में जब आरजेडी चीफ लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी पर करप्शन के आरोप लगे तो मतभेद गहरा गए। नीतीश ने महागठबंधन का साथ छोड़ा और बीजेपी के सपोर्ट से फिर सीएम बन गए।
– महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी का सपोर्ट लेने के नीतीश के फैसले से शरद नाराज बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि या तो वे पार्टी छोड़ देंगे या नीतीश की अगुआई में पार्टी ही उन्हें बाहर कर देगी।
शरद यादव क्या कह रहे हैं?
शरद यादव ने कहा है कि हमने अपनी राह चुन ली है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन साथ है या नहीं। कुछ लोगों ने राह बदल ली है, हमने नहीं बदली। हम अपनी राह पर हैं। जनता बताएगी किसका रास्ता सही है। हमने हजारों विधायक बनाए, सैकड़ों सांसद बनाए। इसकी कोई परवाह नहीं, कौन साथ है। इस बात की भी परवाह नहीं कि आगे मेरे साथ क्या होगा। यह लड़ाई नहीं कि कौन असली है? सवाल यह है कि कौन सही है? यह पार्टी हमारी बनायी हुई है। इतनी मेहनत से पार्टी बनायी और आज कह रहे हैं कि आपका घर नहीं।
नीतीश का क्या है दावा?
नीतीश का कहना है कि 71 विधायक, 30 विधान पार्षद, दो लोकसभा सदस्य, 7 राज्यसभा सांसद और 16 राज्यों के अध्यक्ष हमारे साथ। दो-तिहाई सांसद – विधायकों को साथ लेकर शरद या तो जदयू तोड़ दें या फिर सदस्यता गंवाने को तैयार रहें।
जनता दल परिवार का हिस्सा रही पार्टियों के पास 82 सांसद, राज्यसभा में ज्यादा असरदार
– जनता दल परिवार से अलग हुए 8 दल वजूद में हैं। इनमें से दो दल जेडीयू और एलजेपी बीजेपी के साथ हैं।
– 543 सीटों वाली लोकसभा में 41 सांसद इन दलों के हैं। यानी सिर्फ 7.5%। हालांकि, राज्यसभा में 243 में से 41 सांसद जनता दल परिवार की पार्टियों से हैं। यानी 17%। इस तरह राज्यसभा में ये दल ज्यादा मजबूत हैं।
– इनमें से भी जेडीयू के 10 सांसद बीजेपी के साथ हैं। 8 सांसदों वाली बीजेडी का झुकाव भी अभी बीजेपी की तरफ है।
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